देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगले दो सप्ताह तक मध्य और उत्तर भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। इसका सबसे अधिक असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि भूमध्यसागर से आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण मानसून की आगे बढ़ने की गति प्रभावित हुई है। इसी वजह से मध्य भारत में मानसून की प्रगति अपेक्षा से धीमी है।
अब तक मानसून केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और दक्षिणी महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है, जहां अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश की संभावना है। वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और अन्य उत्तरी राज्यों में अगले पखवाड़े सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून के पहले 10 दिनों में देशभर में सामान्य से 26.5 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि विभाग का कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह में मानसून के फिर से रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। यदि जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश होती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई पर इसका प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धान, कपास, सोयाबीन और दलहन जैसी खरीफ फसलें समय पर बारिश पर निर्भर करती हैं। यदि बारिश में और देरी होती है, तो किसानों की बुवाई प्रभावित हो सकती है और कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
संवाददाता – रुचिका धोटे, भोपाल
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