कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरिवंश नारायण सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के मध्य प्रदेश से अलग होने के समय की भावनाओं को याद करते हुए कहा कि उस समय कई विधायकों की आंखों में आंसू थे। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण बताया।
सम्मेलन में युवा विधायकों को लोकतांत्रिक मूल्यों, सुशासन और जनता के प्रति जवाबदेही के विषय में मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही, राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और विकास के मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य युवा जनप्रतिनिधियों को नीति निर्माण, प्रशासनिक समझ और नेतृत्व कौशल में मजबूत बनाना था, ताकि वे भविष्य में अपने-अपने राज्यों के विकास में अहम भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। सम्मेलन ने न केवल अनुभव साझा करने का मंच प्रदान किया, बल्कि राज्यों के बीच सहयोग और एकता का संदेश भी।
संवाददाता रुचिका धोटे, भोपाल
.jpeg)
कोई टिप्पणी नहीं: