मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने बड़ा ऐलान करते हुए “मां सरस्वती लोक” और “राजा भोज शोध संस्थान” बनाने की घोषणा की है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार मुख्यमंत्री भोजशाला पहुंचे, जहां उन्होंने मां वाग्देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की। बताया जा रहा है कि करीब 750 वर्षों में यह पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने भोजशाला में इस प्रकार पूजा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार को आने वाले समय में धार्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। “मां सरस्वती लोक” को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है, जबकि “राजा भोज शोध संस्थान” में इतिहास, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान पर शोध कार्य किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य भोजशाला की ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करना है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने भोजशाला आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की। साथ ही धार जिले में लगभग 88 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राजा भोज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि धार की पहचान ज्ञान, संस्कृति और सनातन परंपरा से रही है। उन्होंने कहा कि सरकार धार को पुरातत्व, पर्यटन और शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए लगातार कार्य करेगी।
संवाददाता रुचिका धोटे, भोपाल
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