जांच के दौरान एक आरोपी युवक ने कैमरे के सामने दावा किया कि वह “साबुत जानवर” तक उपलब्ध करा सकता है। उसने बताया कि ग्राहक को जो भी चाहिए—हिरण या चिंकारा—वह सिर्फ दो दिन पहले बताने पर उपलब्ध करा देगा। कीमत भी तय है, जो करीब 5 से 7 हजार रुपये तक बताई जा रही है।
इस पूरे नेटवर्क के तार भोपाल और आसपास के जंगलों से जुड़े बताए जा रहे हैं, जहां वन्यजीवों का अवैध शिकार कर उनका मांस शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल जंगलों का संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि टाइगर जैसे बड़े शिकारी जीवों के भोजन पर भी असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अवैध शिकार से वन्यजीवों की संख्या तेजी से घट सकती है और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, वन विभाग और पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
अब सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार पर कब तक लगाम लगाई जा सकेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होगी।
संवाददाता रुचिका धोटे, भोपाल

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