मध्य प्रदेश के औद्योगिक हब पीथमपुर, जिसे राज्य का ‘डेट्रॉइट’ कहा जाता है, इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव का सीधा असर अब स्थानीय उद्योगों पर देखने को मिल रहा है।
उद्योग संचालकों के अनुसार, कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा, निर्यात-आयात में अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण कई फैक्ट्रियां या तो बंद हो गई हैं या सीमित क्षमता पर चल रही हैं। इसका सीधा असर मजदूरों पर पड़ा है, जहां 20 हजार से अधिक श्रमिकों के बेरोजगार होने की बात सामने आ रही है।
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, जो ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता है, अब धीमी रफ्तार से जूझ रहा है। कई छोटे और मध्यम उद्योगों ने उत्पादन घटा दिया है, जिससे सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है।
उद्योग संचालकों का कहना है कि अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, वहीं उद्योगों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वहीं, इस पूरे मामले में सरकार के क्राइसिस मैनेजमेंट पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय व्यापार संगठनों का मानना है कि सरकार को तत्काल राहत पैकेज, टैक्स में छूट और उद्योगों को समर्थन देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि स्थिति को संभाला जा सके।
संवाददाता रुचिका धोटे, भोपाल

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