जनपद पंचायत ग्यारसपुर का मामला—सचिव के पर्सनल खाते में भुगतान, नियमों पर उठे गंभीर सवाल
विदिशा।जिले की जनपद पंचायत ग्यारसपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत धामनोद में शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत की राशि को नियमों की अनदेखी करते हुए सीधे पंचायत सचिव नत्थू सिंह के निजी खाते में ट्रांसफर किया गया, जिससे वित्तीय अनियमितता के आरोप लगने लगे हैं।
मिली जानकारी और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के अनुसार, पंचायत दर्पण पोर्टल पर नत्थू सिंह को “विक्रेता” के रूप में दर्शाते हुए कई भुगतान दर्ज किए गए हैं। विशेष रूप से 10 मार्च 2026 को ₹16,960 का भुगतान ग्राम पंचायत धामनोद द्वारा उनके नाम पर दर्शाया गया है। इसके अलावा पूर्व में भी ₹5000 सहित अन्य भुगतान अलग-अलग पंचायतों से उनके नाम पर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है, जिससे पूरे मामले में संदेह गहराता जा रहा है।
व्यय संबंधी दस्तावेजों में भी नत्थू सिंह के नाम से भुगतान दिखाया गया है, जबकि अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि सचिव स्वयं ही विक्रेता बनकर भुगतान क्यों प्राप्त कर रहे हैं और क्या यह प्रक्रिया नियमानुसार है।
मामले में जब सचिव नत्थू सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उनके खाते में आई राशि “शिविर आयोजन” के खर्च के लिए उपयोग की गई। वहीं, सरपंच पति वीरेंद्र सिंह चौहान ने इसे जनपद की राशि बताते हुए कहा कि इसे अस्थायी रूप से सचिव के खाते में डालकर वापस कर दिया गया। दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास होने से मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है।
इस संबंध में जनपद पंचायत ग्यारसपुर के सीईओ जितेंद्र जैन ने “आपातकालीन स्थिति” का हवाला देते हुए सचिव द्वारा भुगतान किए जाने की बात कही, लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि यह किस नियम के तहत किया गया, तो वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
वित्तीय नियमों के अनुसार पंचायत की राशि का भुगतान सीधे किसी व्यक्ति के निजी खाते में करना सामान्यतः प्रतिबंधित माना जाता है। ऐसे मामलों में भुगतान पंचायत के अधिकृत बैंक खाते से ही अधिकृत प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती नहीं बरती गई तो पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर असर पड़ेगा।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में विभागीय जांच, वित्तीय ऑडिट और आवश्यक होने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
संवादाता:- खुमान सिंह चौहान- ग्यारसपुर(विदिशा)
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