वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कई देशों को अब रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में नई हलचल शुरू हो गई है। पहले रूस पर लगाए गए कई प्रतिबंधों के कारण कई देशों को सीधे रूसी तेल खरीदने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के तेल और गैस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना था। हालांकि समय के साथ कई देशों में ऊर्जा संकट और तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इन नियमों में कुछ नरमी दिखाई जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलती है तो इससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। सप्लाई बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है और कीमतों में कुछ कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
भारत, चीन और कुछ अन्य एशियाई देशों ने पहले भी रियायती दरों पर रूस से तेल खरीद कर अपने ऊर्जा भंडार को मजबूत किया है। अब नए फैसले के बाद और भी देश इस विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि पश्चिमी देशों के कुछ नेता अभी भी इस फैसले को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि रूस से तेल खरीद बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर कई विकासशील देशों का मानना है कि सस्ती ऊर्जा उनके लिए आर्थिक रूप से जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
संवाददाता: रुचिका धोटे, भोपाल

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