जानकारी के अनुसार, गांधी मेडिकल कॉलेज में जनवरी 2026 से अब तक 5 ऐसे युवाओं को भर्ती कराया गया है, जिन्हें खून पीने की आदत लग चुकी थी। सभी मरीजों में एक जैसा पैटर्न देखा गया—पहले मजाक या ट्रेंड के तौर पर शुरुआत, फिर धीरे-धीरे यह एक लत में बदल गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह की गतिविधि बेहद खतरनाक है और इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खून के माध्यम से संक्रमण, बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे जानलेवा स्थिति भी बन सकती है। विशेषज्ञों ने इसे मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से हानिकारक बताया है।
परिजनों का कहना है कि जब उन्हें इस अजीब लत के बारे में पता चला, तो उन्होंने युवाओं को घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी और इलाज के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचाया। कई मामलों में मरीजों को 3 दिन से लेकर एक सप्ताह तक निगरानी में रखा गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं और अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रहे ऐसे खतरनाक ट्रेंड्स से दूर रहना जरूरी है और किसी भी असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज न करें।
यह घटना न केवल भोपाल बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि इंटरनेट ट्रेंड्स के अंधानुकरण से गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
संवाददाता रुचिका धोटे, भोपाल

कोई टिप्पणी नहीं: