प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्चे के शरीर पर 10 से ज्यादा मधुमक्खियों ने डंक मारे, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। घटना के बाद बच्चा स्कूल के कार्यालय में करीब आधे घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन उसे समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया। बताया जा रहा है कि यदि उसे तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
करीब 30 मिनट बाद बच्चे को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
प्रशासन ने भी प्रारंभिक जांच में माना है कि बच्चे के इलाज में देरी हुई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
यह घटना न केवल स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को भी उजागर करती है।
संवाददाता रुचिका धोटे, भोपाल

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