मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि आदिवासी समाज के लिए अलग धर्म कोड अब समय की मांग और देश की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ही डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी निवास करते हैं, यदि यह समाज संगठित होकर अपने अधिकारों की आवाज़ बुलंद करे तो सरकार को आदिवासियों को उनका संवैधानिक अधिकार देना ही पड़ेगा।
उमंग सिंघार बुरहानपुर जिले के नेपानगर में आयोजित 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस महासम्मेलन में शामिल होना उनके लिए गर्व और आत्मीयता का विषय है। मध्यप्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से आए हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एकता, चेतना और संस्कृति का जीवंत उत्सव बना दिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। उन्होंने बताया कि वे पहले भी विभिन्न समाजों के साथ मिलकर जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहे हैं और अब आदिवासी समाज के पास अवसर है कि वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर का जन आंदोलन बनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मंच से किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि समाज के अधिकारों की बात कर रहे हैं।
उमंग सिंघार ने कहा कि जिस प्रकार झारखंड के आदिवासियों ने अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष किया, उसी तरह मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज को भी आगे आना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अलग धर्म कोड की मांग को लेकर आदिवासी समाज की ओर से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख हो कि अलग धर्म कोड आदिवासियों का संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है।
अपने संबोधन के अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण की लड़ाई में वे सदैव आदिवासी समाज के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
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